तुम अपना रंज-ओ-ग़म… अपनी परेशानी मुझे दे दो…

SHAGOON

दोस्तों, अपनी तो हसरत ही रह गई लेकिन शायद आपके पास कोई ऐसी हमकदम, कोई हमसफ़र ज़रूर होगी, जो घनी उदासी के बीच भी आपका चेहरा थामकर ये गीत गुनगुनाते हुए आपको हौसला देते रहती होगी। वो ढाल बनकर मुश्क़िल वक़्त के थपेड़ों से आपको बचाने के लिए आपके आगे आने की हिम्मत दिखाते हुए और अपनी मुहब्बत की बूंद-बूंद आप पर ख़र्च कर देती होगी। महान साहिर लुधियानवी ने औरत के समर्पण और अपने साथी के लिए उसकी फिक्र को क्या जादुई अल्फ़ाज़ दिए हैं। क्या कमाल की गहराई है हर एक शब्द में कि सुनने वालों के कानो में घुलते ही रूह तक को तसल्ली मिलती है।

KHAYYAM JAGJEET

साल 1964 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘शगुन’ को नज़ीर साहब ने डायरेक्ट किया था और इसमें अभिनय किया था कमलजीत और वहीदा रहमान ने। फिल्म का संगीत तैयार किया था हमारे और आपके ऑलटाइम फेवरेट ख़य्याम साहब ने और इस गाने में आवाज़ थी उनकी अपनी हमक़दम जगजीत कौर जी की।

libi rana

दोस्तों, परदे पर इस गीत को गाते हुए जो एक्ट्रेस दिखाई देती हैं उनके चेहरे से पल भर को भी देखने वालों की नज़रे नहीं हटती। इस ख़ूबसूरत अदाकारा का नाम है लिबी राना उर्फ निवेदिता। चेहरे पर पड़ते डिंपल और दिलकश मुस्कान वाली लिबी राना बाद के बरसों में छोटे-मोटे रोल करने लगी थीं और फिर ग़ायब ही हो गई। उफ्फ़… वो आधी रोशनी और आधी परछाई में से झांकता लिबी का चेहरा और उनकी घनी ज़ुल्फ़ों का घेरा आज भी देखने वालों पर जादू सा कर देता है।

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60 के दशक के कुछ सबसे यादगार गीतों में से एक बन चुके इस गीत का असर इतने बरसों के बाद भी बरक़रार है। रेडियो पर तो आज भी हर दूसरे या तीसरे दिन किसी श्रोता की फरमाईश पर ये गाना बज उठता है। जगजीत कौर के लिए तो ये उनका सिग्नेचर सॉन्ग माना जाता है और बाद के सालों में भी उनके चाहने वालों के दिलों में रह-रहकर इसी गीत को सुनने की चाहत जागती रही।

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हर मर्द की ख़्वाहिश अपनी औरत के मुंह से कुछ ऐसे ही अल्फ़ाज़, ऐसी ही तसल्ली और ऐसे ही हौसला देने वाली बातें सुनने की होती है। साहिर ने इंसानी जज़्बातों की इस डिमांड को ख़ूब पकड़ा और उसे इस गीत की शक़्ल दे दी। फिर ख़य्याम साहब ने भी एक बार-बार दोहराई जाने लायक धुन बना दी और बाकी का काम जगजीत कौर की दिल-ओ-दिमाग़ और रूह पर दस्तक देती आवाज़ ने कर दिया।

आइये एक नज़र इस ग़ज़ल पर डालते हैं-

तुम अपना रंजो गम, अपनी परेशानी मुझे दे दो

तुम्हें ग़म की कसम इस दिल की वीरानी मुझे दे दो ।

ये माना मैं किसी काबिल नहीं हूँ इन निगाहों में

बुरा क्या है अगर ये दुःख ये हैरानी  मुझे दे दो ।

मैं देखूं तो सही दुनिया तुम्हे  कैसे सताती है

कोई दिन के लिए अपनी निगेहबानी  मुझे दे दो

वो दिल जो  मैंने माँगा था मगर गैरों ने पाया था

बड़ी शै है अगर उसकी पशेमानी मुझे दे दो ।

 

आपको इस ग़ज़ल का यूट्यूब लिंक भी दिए देता हूं…

 

तो आप भी लुत्फ़ उठाइयें इस बेहतरीन नग़मे का और साथ ही सलाम ठोंकते रहियें म्यूज़िक इंडस्ट्री के उन उस्तादों को जिनके गीत आज भी हमारे रंज-ओ-ग़म को राहत पहुंचाते हैं।